(नोट- लेख अच्छा लगे या बुरा कृपया टिप्पणी करना न भूले! धन्यवाद!)
(4.) चिकित्सा विज्ञान की अलग-अलग शाखाओ के विशेषज्ञों का मंतव्य.
यद्यपि आज भी कुछ तर्क दिए जाते है,कई विशेषज्ञ सहमत है कि -
१. डिप्रेशन की बीमारी एक सिंड्रोम (लक्षण-समूह) है जिसमे मायूसी, सामान्य उदासी या शोक से बढ़कर प्रतिबिम्बित होती है! इसे यदि और स्पष्ट करे तो कह सकते है कि अवसाद(डिप्रेशन) की मायूसी तीव्रता के साथ अधिक समय के लिए होती है और इसके लक्षण तथा असक्षमता सामान्य से ज्यादा होते है!
२. डिप्रेशन की बीमारी को नकारात्मक विचार, मनोदशा और व्यवहार से ही परिभाषित नही किया जा सकता है बल्कि इसमे शरीर के क्रिया-कलाप में परिवर्तन को भी समावेश किया जा सकता है (जैसे- खान-पान,नींद और सेक्स गतिविधि) इन कार्यो में परिवर्तन अकसर चेतावार्धी(न्यूरोवेजीटेटिव) लक्षण कहलाते है!
३. कुछ लोग जो डिप्रेशन की बीमारी विशेषतः बायपोलर डिसआर्डर(द्विध्रुवीय बीमारी) से ग्रस्त होते है वे वंशानुगत संवेदनशील होते है!
४. डिप्रेशन की बीमारी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है:
* मनोविकार सम्बन्धी बीमारियाँ इतनी सामान्य है कि कभी-कभी इन्हे मनोचिकित्सा में सर्दी जुकाम की संज्ञा दी जाती है! समाज में डिप्रेशन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूप से प्रभावित करता है! प्रत्यक्ष रूप में चिकित्सा खर्च को ले सकते है और अप्रत्यक्ष में हम उत्पादकता-क्षति और इसके परिणाम स्वरुप अनुपस्थिति को ले सकते है!
* विस्तृत चिकित्सा अध्ययन के अनुसार डिप्रेशन गठिया,उच्च रक्तताप,पुरानी फेफडे की बीमारी और मधुमेह जैसे रोगों की तुलना में अधिक समस्या पैदा करता है और कभी-कभी इसके साथ ह्रदय धमनी के रोग भी होते है!
* डिप्रेशन ह्रदय धमनी के रोग,एच.आई.वी.,दमा और अन्य बीमारियों को बढ़ाने में मदद कर सकता है और जोखिम बढ़ा सकता है! डिप्रेशन की वजह से इन अवस्थाओ में रुग्णता(बीमारी) और विनाशिता(मृत्यु) के अवसर बढ़ सकते है!
५. संसार में लोगो के बीच डिप्रेशन को लेकर अभी भी कई ग़लत मान्यताओं और कल्पित कथाओ की भरमार है! यहाँ तक कि सामाजिक डर के कारण लोग डॉक्टर की मदद नही लेते! इस तरह के विलंब के कारण डिप्रेशन का उचित समय पर निदान और ठीक इलाज नही हो पता है तथा उसकी चिकित्सा की समस्याए गंभीर हो जाती है!
६. सामान्यतः डिप्रेशन की प्रारम्भिक पहचान प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र पर की जाती है न कि मानसिक चिकित्सक के क्लिनिक में होती है! अधिकतर इनमे विभिन्न धारणाये मन ली जाती है! इसका परिणाम कभी यह होता है कि डिप्रेशन की सही पहचान नही हो पाती!
७. मनोदशा असंतुलन में पूर्ण रूप से ठीक होने के लिए लक्षण चाहे मायूसी(ब्लयू) के हो या उग्र हो, दवाईयों के उपयोग के साथ-साथ मनोचिकित्सा तथा गंभीर मामलो में विद्युत-चिकित्सा(ई.सी.टी.) जरुरी होती है! डिप्रेशन की चिकित्सा कई तरह से की जा सकती है और कई बार तो एक ही समय में एक से अधिक प्रकार के अभिगम चिकित्सा में अपनाए जा सकते है!
संक्षेप में डिप्रेशन एक चिकित्सीय बीमारी(madical illness) है! अन्य बीमारियों की तरह डिप्रेशन के भी अनोखे चिन्ह और लक्षण होते है! इसमे अनुसरण और पूर्वानुमान है! यह कई समस्याओं से जुड़ सकता है! महत्वपूर्ण बात यह है कि डिप्रेशन की चिकित्सा हो सकती है और कई प्रकार की प्रभावी चिकित्सा उपलब्ध है! अतः डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्तियों को इसके ठीक होने की आशा राखी जा सकती है!
क्रमशः

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