भारत के जिन शहरों में अभ्यास मैच या टेस्ट मैच होने है, उन्हें ही धमाका का निशाना बनाया गया है.
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के भारत दौरे पर गहराए संकट के बदल दूसरे दिन ही छंट गए! शनिवार को नई दिल्ली में पाँच बम विस्फोटो में दो दर्जन से ज्यादा लोगो की मृत्यु के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट प्रबंधन ने रविवार को कुछ घबराहट दर्शाई थी, लेकिन सोमवार को उस पर काबू पाकर उसने दौरे को हरी झंडी दिखा दी!
पकिस्तान को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया(सीए) के इस निर्णय पर एतराज है! उसकी नजर में यह 'दोहरा मापदंड' है, जबकि यह स्पष्ट ही दोनों देशो में 'खतरे के आकलन' का फर्क है! इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया सरकार को अपनी 'ए' टीम से भी रिपोर्ट मिल ही रही होगी, जो पहले से ही भारत में है! हैदराबाद में कुछ समय पहले विस्फोट हुए थे, पर मंगलवार को वही उसने त्रिकोणीय श्रृंखला में भारत 'ए' को आसानी से हराया!
दूसरी बात यह है कि भारत में मौके की नजाकत भापकर तुंरत निर्णय बदलने की सामर्थ्य भी है! सशक्त लोकतंत्र होने के कारण यहाँ मनमाने निर्णय होने और उन पर जबरदस्ती अडे रहने की संभावना नही है! साढे चार वर्ष तक केन्द्र की संप्रग सरकार आतंकवाद के ख़िलाफ़ कड़े कानून का विरोध करती रही! इसका कारण यह था कि पोटा, टाडा और मकोका जैसे कठोर कानून वारदाते तो रोक नही पाये, लेकिन दुरुपयोग के कारण बदनाम हो गए! शायद सरकार में शामिल कुछ दिग्गजों को यह भी लगता था कि वे गुमराह युवको को समझा-बुझाकर सही रास्ते पर ले आयेंगे! अब उन्हें लगा कि कठोर कानून की जरुरत है, तो वे इसके लिए भी तैयार है! ऐसे प्रावधान भी करेंगे, जिनसे उन कानूनों का दुरुपयोग न हो! आलोचक सरकार के बदले रुख पर भी प्रहार करेंगे, लेकिन हकीकत यह है कि कभी नए कानून की वर्षो जरुरत न पड़े और जब पड़े, तो साल दो-साल में ही पड़ जाए!
दूसरी और पकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार बनने के बाद गुप्तचर एजेंसी 'अईएसआई' को सेना से लेकर गृहमंत्रालय के अधीन करने का निर्णय किया गया था! जब सेना ने विरोध किया, तो प्रधानमंत्री ने अपना निर्णय तुंरत पलट दिया! दोनों देशो के लोकतंत्र एवं सुरक्षा परिदृश्य में यही बुनियादी अंतर है, जिसे पाकिस्तान को समझना चाहिए!
गत मार्च-अप्रेल में ऑस्ट्रेलियाई टीम को पाकिस्तान का दौरा करना था, जो रद्द हो गया! इसके बाद सितम्बर में वहाँ चैम्पियंस ट्रोफी होनी थी, उसे स्थगित करना पडा! इसकी वजह यह थी कि ऑस्ट्रेलिया ही नही दक्षिण अफ्रीका,इंग्लैंड,वेस्ट इंडीज तथा न्यूजीलैंड भी वहा खेलने की हिम्मत नही जुटा पाये! ऑस्ट्रेलिया तो पिछले 13 वर्ष से पाकिस्तान में नही खेला है! पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया के भारत-दौरे को हरी झंडी मिलने के बाद बेहद नाराज है, पर अगले अप्रेल में ऑस्ट्रेलियाई टीम के दौरे की उम्मीद होने से उसे नाराज भी नही कर सकता!
यह अजीब संयोग है कि भारत के जिन शहरों में अभ्यास मैच या टेस्ट मैच होने है, उन्हें ही धमाको का निशाना बनाया गया है! जयपुर में 27-28 सितम्बर को अभ्यास मैच होना है! फ़िर हैदराबाद में भी ऐसा ही मैच निर्धारित है! उसके बाद बेंगलूर में 9 अक्टूम्बर, मोहाली में 17, नई दिल्ली में 29 अक्टूम्बर तथा नागपुर में 5 नवम्बर को टेस्ट मैच होंगे! इनमे से जयपुर,हैदराबाद,बेंगलूर व नई दिल्ली में विस्फोट हो चूके है! इसीलिए केन्द्रीय गृहमंत्रालय तथा राज्य सरकारों को ऑस्ट्रेलियाई टीम की भरकस हिफाजत करनी होगी, क्योकि आतंककारियों का मकसद तो भारत को बदनाम करना ही है! संयुक्त राष्ट्र ने भी सुरक्षा परिषद के विस्तार का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया है! सरकार को स्थाई सदस्यता के लिए मुहिम चलाकर देश को दुनिया में उच्च स्थान दिलाने का प्रयास करना चाहिए! दुश्मनों को यही हमारा मुंह तोड़ जवाब होगा!

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