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डिप्रेशन(अवसाद) भाग-2.


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी


(नोट - लेख अच्छा लगे या बुरा कृपया टिप्पणी करने न भूले! धन्यवाद!)


(2.) शोक(ग्रिफ) और अवसाद(डिप्रेशन) में क्या अन्तर है?













शोक या मायूसी, मनोदशा में अशांति की उपज है जो सामान्य है और किसी भी व्यक्ति की जिंदगी में अनुभव की दृष्टि से आवश्यक भी है! यह किसी भी तरह के जीवन में हुई क्षति की प्रतिक्रिया है जो वास्तव में दिखाई दे और न भी दिखाई दे! यद्यपि प्रारंभिक अवस्था में दुःख की यह प्रतिक्रिया असक्षम भी बना सकती है! आरंभिक तीव्र प्रतिक्रिया धीरे-धीरे लुप्त भी हो सकती है और जैसा हम समझते है ऐसी न भी हो! दुःख या मायूसी की प्रतिक्रिया स्वयं तक सीमित होती है और लगभग एक वर्ष की अवधि में समाप्त हो जाती है! बुजुर्ग लोगो में सुधार की प्रक्रिया तुलना में अधिक समय लेती है! वास्तव में किसी प्रिय व्यक्ति या बहुमूल्य वस्तु के खो जाने पर दुखी होना एक सामान्य बात है! हालांकि जब ये दुःख की अवस्था लम्बी खींचती जाती है या अनुपात में गंभीर होती है तब यह स्तिथि चिंतामय हो जाती है!
कोई भी व्यक्ति किसी भी नुकसान के बाद दुःख, शोक या विषाद महसूस कर सकता है! परन्तु बहुत दुखी होना या लंबे समय तक किसी भी काम में मन नही लगना चिकित्सा की दृष्टि से डिप्रेशन है! डिप्रेशन नुकसान की रोगात्मक प्रतिक्रिया हो सकता है जो वास्तविक,आशंकित,अनुमानित या दिखाई देने वाला भी हो सकता है! परिणाम स्वरुप डिप्रेशन गंभीर,लंबा और इतना बढ़ सकता है कि किसी की भी जिंदगी को पूर्ण से सभी क्षेत्र के लिए बेकार या असक्षम बना दे! कभी कभी ऐसा भी होता है कि बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के अच्छी भली जिंदगी में यह रोग आ जाता है!
प्रसिध्द मनोचिकित्सक सिग्मंड फ्रोईड सामान्य शोक और डिप्रेशन के बीच अन्तर स्पष्ट किया है! यद्यपि दोनों निश्चित समय तक ही रहते है परन्तु मायूसी या शोक की स्तिथि में वास्तविक नुकसान होता है जबकि डिप्रेशन में नुकसान अधिक होता है जो भावात्मक प्रकृति का होता है! सामान्य दुःख या शोक की स्तिथि में व्यक्ति स्वयं की शक्ति नही खोता है, जबकि डिप्रेशन में गहराई के साथ खोता है!
नीचे विभिन्न आयु समूह और अलग-अलग क्षेत्र के रोगियों के कुछ दृष्टांत दिए जा रहे है! यद्यपि इस बात का ध्यान कर ले कि डिप्रेशन के लक्षण और संकेत प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते है ;
* एक व्यस्त युवक कई सप्ताह से मायूसी महसूस करता है, सो नही सकता है, अपना वजन खो रहा है जबकि वह न तो बीमार हुआ, न ही उसने डाएटिंग की! कई महीनो से वह नौकरी पर नही जाना चाहता है और इस कारण वह लगातार अनुपस्थित हो रहा है!
* अपनी नौकरी खोने के एक महीने बाद भी एक युवा व्यक्ति अपने आप को ठीक-ठाक पता है और दूसरी नौकरी के लिए कोई चिंता नही करता है! वह कोई जिम्मेदारी लेने की जरुरत भी महसूस नही करता है! वह ऐसी किसी भी ऐसी गतिविधि में भाग नही लेता है जिसमे पहले उसे खुशी मिलती थी!
* शेयर मार्केट में आई मन्दी से एक युवा शेयर होल्डर लंबे समय के लिए मायूसी में चला गया और उसके ठीक होने के कोई आसार नजर नही आते! उसे आत्महत्या के विचार आते है! किसी शारीरिक श्रम के बिना ही उसे श्वास लेने में कठिनाई महसूस होती है! नींद नही आती है! भूख नही लगती है! वह पहले एक दिन में दो सिगरेट पीता था अब दिन में एक पैकेट समाप्त कर देता है! उसके सभी शारीरिक परीक्षण सामान्य है!
* एक नवविवाहित युवती विवाह के बाद अपने पति के घर जाती है और दहेज़ की समस्या का सामना करती है! वह जीवन से निराश हो जाती है और उसके सामने सिर्फ़ अंधकार ही दिखाई पड़ता है! इसमे कोई सुधार नही होता है! उसे सरदर्द,भूख की कमी,थोड़े से काम पर थकावट होना,भूख नही लगना,लगातार दर्द से कराहना,थोडी सी भी आवाज को सहन नही कर पाना जैसे लक्षण महसूस होते है! घर के कामकाज में से उसकी रूचि चली गई है और यहाँ तक कि उसे आत्महत्या के विचार आते है! उसकी लेबोरेटरी और एक्स रे चिकित्सा से संबंधित सभी जांच सामान्य पाई गई है!
* एक सुतार(कारपेन्टर) अपने पुत्र की अल्प बीमारी से मृत्यु के एक माह बाद भी अपने काम के प्रति उदास बन जाता है, उसका चेहरा डिप्रेशन के कारण अजीब सा मायूस दिखाई देता है! उसकी आँखों की चमक खो चुकी है! उसकी आवाज का स्वर बदल गया है! अधिकतर वह कमरे के एक कोने में कंधे झुकाए अकेला बैठा रहता है!
* सातवीं कक्षा में अध्ययनरत एक होनहार महत्वाकांशी छात्र पिछले कुछ दिनों से स्कुल में कमजोर हो गया है! उसका मन पढाई में नही लग रहा है और अक्सर उसके सहपाठियों से झगडा करता है! उसके पेट में लगातार दर्द उठाता है और पैर में अधिक पसीना आता है! उसके पारिवारिक डॉक्टर द्वारा कोई शारीरिक लक्षण भी नही बताया गया! उसके पेट की सोनोग्राफी भी सामान्य है! उसके माता-पिता के बीच पिछले कुछ माह से लगातार झगडा हो रहा है!
* एक महिला अपनी माता के मृत्यु के एक वर्ष बाद भी उदास रहती है और कभी-कभी आत्महत्या के बारे में सोचती है! वह अब स्वयं की साफ़-सफाई की भी उपेक्षा करती है!
* एक सफल व्यापारी जो ये मानने लगा कि उसका दिवालिया निकालने वाला है, जो पहले किसी समय अपटूडेट आधुनिक स्टाइल में रहा करता था! अब वह ऑफिस में भी अपनी कंघी या कपड़ो की ओर ध्यान नही देता है! वह अपने अधीनस्थ कर्मचारियों में लगातार कमियाँ निकालता है! उसे चक्कर आने लगे है! प्रातः कुछ समय के पहले जल्दी ही उठ जाता है परन्तु तरोताजा महसूस नही करता! उसकी शारीरिक जांच के दौरान सब कुछ सामान्य पाया गया है!
* एक समर्पित महिला अपने बच्चे को त्यागना चाहती है क्योकि उसे जानकारी मिली कि उसका पति उसे तलाक देना चाहता है! वह उसकी सामान्य खुराख से अधिक खाने-पीने लगी है और पिछले छः माह में उसने काफी वजन बढा लिया! वह रात में जल्दी ही नौ बजे बिस्तर पर सोने चली जाती है और सुबह देरी से 10-11 बजे उठती है! वह अपनी व्यक्तिगत साफ़-सफाई की ओर ध्यान नही देती है! उसकी शारीरिक जांच के दौरान सब कुछ सामान्य पाया गया है!
* एक माता द्बारा तंदरुस्त बच्चे को जन्म देने के बाद वह बच्चे के प्रति उदास रहने लगी! वह बच्चे के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नही निभा पा रही थी! उसे वितीय समस्याओ के साथ साथ अपने पति के साथ संबंधो में भी अड़चन आने लगी और महसूस करने लगी कि उसके पति के माता-पिता की ओर से मानसिक और अन्य सहयोग प्राप्त नही हो रहा है!
* एक नवयुवती को महसूस होने लगा कि उसके बाल पतले होने लगे है! वह उसकी सुन्दरता खो रही है! अब उसकी ओर कोई ध्यान नही दे रहा है!
* एक नवयुवती अपने प्रत्येक मासिक धर्म से पूर्व बहुत तनाव महसूस करती है! लगातार सरदर्द होता है! वह चिडचिडी हो गई है और पिछले चार माह से तुच्छ या छोटी-छोटी बातो पर भी चिडती है!
* एक आलसी सेक्रेटरी महसूस करती है कि उसका कोई भी काम ठीक से नही हो पाता है! उसके बोस ने उसे नौकरी पर इसीलिए रखा है कि वह उसके प्रति दयाभाव रखता है!
आईये एक उदारण के द्बारा डिप्रेशन को समझने की कोशिश करे!
हीरालाल एक गरीब किसान है! उसके परिवार में चार बच्चे है! उधार पैसो की मदद से और कड़े परिश्रम के बाद उसने बीज लाके बोए! लेकिन इस साल मानसून में सूखा पडा और फसल हो न पाई! उधार पैसो का ब्याज उसके सर पर चढ़ रहा है! बच्चो का लालन-पालन तक मुश्किल हो गया है! वह इतना मायूस हो गया है कि उसकी नींद व भूख उड़ गई है! उसे घुटन सी महसूस होती है! यहाँ तक कि उसे बार-बार आत्महत्या के विचार आते है! उसने अपने गम को भूलाने के लिए शराब का सहारा लिया है! अब वह बातो बातो में घरवालो और पडोसियों से झगडा करता है! उसके एक निकट परिवारजन ने उसे सरकारी अस्पताल के मनोरोग विभाग में ले जाकर सलाह ली! उसकी शारीरिक एवं अन्य जांच सामान्य पाई गई! मनोचिकित्सक ने उसे डिप्रेशन होने का निदान किया है और उसे अस्पताल में दाखिल करके डिप्रेशन प्रतिरोधी-दवाईया एवं अन्य मनोचिकित्सा दी! तीन सप्ताह बाद अब हीरालाल धीरे धीरे अपने स्वभाव एवं लक्षणों में सकारात्मक परिवर्तन महसूस कर रहा है और अपने निकटजनों के सहारे डिप्रेशन एवं अपने जीवन के हादसों से धीरे धीरे उबरने का प्रयास करने में अब ख़ुद लग गया है!

क्रमश...........























प्रतिक्रियाएँ

Re: डिप्रेशन(अवसाद) भाग-2.
योगेश जी डिप्रेशन को बहुत अच्छे से समझा कर लिखा है आपने। सराहनीय प्रयास है।