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डिप्रेशन (भाग-1)


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी


(नोट - लेख अच्छा लगे या बुरा कृपया टिप्पणी करना न भूले! धन्यवाद!)

(1.) डिप्रेशन (अवसाद) किसे कहते है?















सामान्य तौर पर डिप्रेशन (अवसाद) को निम्न संदर्भ में प्रयोग किया जाता है :
* लंबे समय तक लगातार और नकारात्मक सोच या दुखी मनोदशा, जो किसी के भी जीवन को कई तरह से प्रभावित करती है या
* जिन गतिविधियों में व्यक्ति रूचि और खुशी पाता था उनमे दिलचस्पी न रहे!
प्रत्येक व्यक्ति समय-समय पर डिप्रेशन और उदासी का अनुभव करता है! कई लोग एक बार या ज्यादा लेकिन अपने आप में छोटी और सीमित अवधि के लिए डिप्रेशन का अनुभव तो करते ही है! जब इस तरह की संवेदनशीलता या भावुकता अधिक समय तक रहती है, व्यापक होती है और बार-बार सामने आती है तब व्यक्ति डिप्रेशन से प्रभावित हो सकता है!
डिप्रेशन मानसिक कमजोरी या चारित्रिक दोष की निशानी नही है! डिप्रेशन सुस्ती,कमजोरी,व्यक्तिगत असफलता या इच्छा शक्ति की कमी का परिणाम नही है! हालांकि डिप्रेशन शब्द के कई अर्थ होते है, मनोचिकित्सा के संदर्भ में रोगी द्वारा उनकी भावात्मक पीडा की अनूभूति का वर्णन किया जाता है और इस अर्थ में यह एक लक्षण-समूह (सिंड्रोम) है!
सोच, अनुभव और कामकाज में परिवर्तन डिप्रेशन का मुख्य लक्षण है! हालांकि यह परिवर्तन धीरे-धीरे आता है, डिप्रेश्ड व्यक्ति उसकी बीमारी आरम्भ होने से पूर्व की स्तिथि से भिन्न होता है - शायद उसके स्वयं के व्यव्हार के विपरीत! डिप्रेशन कई प्रकार का होता है और भिन्न मात्रा में पाया जाता है! डिप्रेशन कई प्रकार से व्यक्त होता है जैसे कमजोरी,उदासीनता,बदकिस्मती(दुःख),जी ऊबना,विषाद,उद्विग्नता,आलस्य आदि महसूस होना! डिप्रेश्ड व्यक्ति स्वयं का ध्यान रखने की बजाय स्वयं के प्रति लापरवाह हो जाता है! उसकी सफलताओं के प्रयास निष्क्रियता और विरक्ति में बदल सकते है! कुछ लोग दुःख, उदासी, मायूसी आदि विरक्ति भाव व्यक्त किए बिना ही डिप्रेश्ड हो जाते है! ऐसे समय में डिप्रेशन शारीरिक लक्षणों जैसे कि नींद में गड़बड़,शीघ्र थकावट,दर्द और पीडा आदि से प्रकट हो सकता है! जब व्यक्ति हमेशा काम के दौरान थका हुआ दिखाई पड़े या उकताया हुआ नजर आए तब वास्तव में वह डिप्रेशन से ग्रसित हो सकता है! डिप्रेश्ड व्यक्ति हमेशा सोचता है कि वह बहुत कुछ खो चुका है और भविष्य में भी हमेशा खोता ही रहेगा और इस प्रकार वह किसी काम का नही रहा और वह ख़राब इंसान है, यहाँ तक कि जीने के योग्य भी नही है! वह शराब और नशे का आदी भी हो सकता है! गंभीर मामलों में उसे जीवन को समाप्त करने की इच्छा हो जाती है! यहाँ तक कि वह आत्महत्या करने का प्रयास भी कर सकता है!
क्रमशः ...........