देश के हर कोने से आए दिन जाली नोट बरामद होते रहे है! किसी को भी इस पर कभी घबराहट नही हुई, पर अब सरकार ने ही सन् 1996 और 2000 के कुछ ख़ास सीरीज के नोटों की अदला-बदली का भारतीय रिजर्व बैंक को निर्देश देकर जतला दिया है कि वाकई स्तिथि चिंताजनक है!
दरअसल ये नौबत आने के संकेत गत वर्ष के अंत में मिल गए थे! भारतीय स्टेट बैंक की अलीगढ (उतर प्रदेश) शाखा से दिसम्बर 2007 में 12.66 लाख रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे! फ़िर उसी शाखा से गत 7 अगस्त को 46.24 लाख रुपये के जाली नोट मिले! यही नही नेपाल से जुड़े उतर प्रदेश के सिध्दार्थ नगर जिले में डुमरियागंज स्तिथ भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से तो डेढ़ करोड़ रुपये के जाली नोट की बरामदगी के साथ ही ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ, जिसमे बैंक कर्मचारी भी शामिल थे!
हर वर्ष देशभर में औसतन 6 करोड़ के जाली नोट बरामद होते है! सरकार को ये भी पता है कि पाँच राज्यों- उतर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश और कर्नाटक में ये समस्या विकट है, पर अब तक सरकार इससे निपटने में नाकाम रही है! पिछले दिनों इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने केन्द्र सरकार को एक रिपोर्ट सौपी थी, जिसमे कहा गया था कि भारत 'आर्थिक आतंकवाद' की चपेट में है! आईबी के मुताबिक तकरीबन 51 अरब डॉलर के बराबर जाली मुद्रा प्रचलन में चल रही है! इससे भी भारत में आतंककारी गतिविधियों को वितपोषण हो रहा है! लगता यही है कि जो लोग 'सिमी' जैसे आतंककारी गिरोहों को चंदा देते है, उन्हें बदले में दुगुनी नकली मुद्रा का प्रलोभन दिया जाता है! यही कारण है देश में इतने ज्यादा जाली नोट आ गए है कि सरकार को उसी श्रृंखला के छपे अपने असली नोट बदलने पड़ रहे है! शुरुआत में सरकार ने 1000 रुपये व 500 रुपये के नोट ही बदलने का निर्णय किया है! इससे यही लगता है कि 10,20,50, और 100 के जाली नोट भी बाजार में काफी संख्या में चल रहे है!
माना जा रहा है कि पकिस्तान में जाली नोट छापकर पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल सीमाओं तथा नेपाल और दुबई होकर यहाँ लाये जाते है! बैंक चेस्ट में उनका पहुच जन तो अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है! बिना बैंक कर्मियों की साठगाँठ के ऐसा नही हो सकता है!
मुश्किल यह है कि जिसे भी जाली नोट मिलता है, वह घाटे से बचने के लिए उसे चलाने के चक्कर में ही रहता है! पुलिस को सूचना देने से उसे नुकसान के साथ ही जेल जाने का डर भी रहता है! अब तो एटीएम से रकम मिलती है! अगर किसी ग्राहक को जाली नोट मिल जाता है तो बैंक उसकी जिम्मेदारी भी नही लेता! अगर ग्राहक हर नोट को जांच-परख कर एटीएम से बाहर निकालने की सोचे तो बाहर खड़े अन्य ग्राहक जान खा जाए!
सरकार ने काले धन की समस्या से निपटने के लिए तीन दशक पूर्व विमुद्रीकरण किया था! तब काफी हल्ला मचा था! वर्तमान सरकार शायद हर काम खामोशी से करने में यकीन रखती है! आगे क्या होगा ये तो जनवरी में पता चलेगा, जब इन नोटों की अदला-बदली होगी! वैसे तय है कि जब तक हम ऑस्ट्रेलिया, चीन, हांगकांग, थाईलैंड व इजराइल की तरह पॉलीमर नोट शुरू नही करेंगे, दिक्कत बनी रहेगी! तब तक डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का ही सहारा है!

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