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(देश) स्वतंत्रता किसको??????????

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चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी



(नोट - लेख अच्छा लगे या बुरा कृपया टिप्पणी करना न भूले! धन्यवाद !)

















घर में छुपा भेदी.

कहते है कि नक़ल में भी अक्ल की जरुरत पड़ती है! हमने संविधान की तो नक़ल कर ली अंग्रेजो से और उसे लागू करने वाले भी उसी मानसिकता के लोग तैयार कर दिए! आज हमारे जनप्रतिनिधि और प्रशासक कोई भी देश-हित के प्रति चिंतित नजर नही आ रहे है! इनकी जेबे भरती रहे और फाईलो का पेट! अच्छे लोगो को ढूँढना पड़ता है! अच्छे कानून बनने भी बंद हो गए! इनकी दूरदर्शिता, देशहित, भारतीय संस्कृति आदि का अभाव दिखाई पड़ता है! बना किसके लिए रहे है? अपने तात्कालिक स्वार्थो की पूर्ति के लिए!
हमने पिछले साथ वर्ष में क्या नही देखा? बड़े बड़े घोटाले देखे, किसी को सजा नही हुई! दर्जनों गोलीकाण्ड हो गए! पुल और बाँध टूट गए! मरने वाले मर गए, किसी बड़े अधिकारी की नौकरी नही गई! जमीन और शराब के, मादक पदार्थो के माफिया असंख्य हो गए! लाखो पंगु हो रहे है! इनको तो खजाने में पैसा चाहिए!
आज इतनी बड़ी संख्या में विदेशी इस देश में रह रहे है! एक करोड़ से अधिक होंगे! चाहे बंगलादेशी हो, नेपाली हो, पाकिस्तानी हो! किसको फर्क पड़ता है! पहले ही भुखमरी और बेरोजगारी के आंकड़े कौनसे कम है! कुछ और बढ जायेंगे! आज तो पानी गले के ऊपर से आने लग गया है! इन अनधिकृत घुसपेठियो ने अपने राशन कार्ड बनवा लिए! मतदाता पहचान पत्र बनवा लिए! हमारे कहे जाने वाले अधिकारी ही बना रहे है! इससे अधिक शर्म की बात और क्या हो सकती है! क्या किसी भी अधिकारी को पता है कि सन् 2003 के चुनाव में, उससे पिछले चुनाव(1998) के मुकाबले 11 प्रतिशत अधिक मतदाता थे! कहाँ से आए? इससे पहले दो चुनावों में 7 और 6 प्रतिशत ही वृध्दि थी! मतदाता दुगने कैसे हो गए? मतदाता सन् 1990 के चुनाव में भी बहुत बढे थे! इसका कारण था मतदाता की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर देना!
हमारे यहाँ राशनकार्ड बनवाना सबसे आसान है! अपने घर के पते बिजली-पानी का बिल जमा करा दो फीस के साथ और ले आओ राशनकार्ड! उसी राशन कार्ड की प्रति लगाकर मतदाता सूची में नाम जुड़वा लो! तब तो फोटो पहचान पत्र बन ही जाएगा! प्रश्न यह है कि क्या इस पहचान पत्र को नागरिकता का पहचान-पत्र मान लिया जाए? यदि नही, तो इतने सारे लोग कैसे हमारे यहाँ नागरिको की हैसियत से रह रहे है! जिनको दस वर्ष से अधिक हो गए, वे तो मूळ निवासी होने का प्रमाण पत्र भी ले चुके है! इनके अपने बैंक खाते खुले हुए है! अब अधिकारी इनको किस आधार पर विदेशी प्रमाणित करेंगे, वे ही जाने! हम तो मानते है कि उन्होंने यह सारा बोझ जनता के सिर पर डाल दिया! फ़िर भले ही ये कोई भी अपराध करे! इनके पास है क्या जो खो जाएगा? मूळ निवास का प्रमाण पत्र भी तब दिया जाना चाहिए जब आवेदक के माता पिता के मूळ निवास स्थान से उनको वहा का मूळ निवासी होने की तस्दीक हो जाए! ऐसी रिपोर्ट्स कौन बना रहा है इनके लिए? इसके साथ पुलिस की रिपोर्ट होगी! गाँव के पटवारी की रिपोर्ट होगी! इसके आभाव में एक व्यक्ति एक से अधिक स्थान पर भी अपना नाम जुड़वा सकता है! जिन लोगो के द्बारा ऐसे प्रमाण बनाये जाते है, वे तो सीधे सीधे देशद्रोही है! इन्हे सार्वजनिक किया जाना चाहिए!
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कानूनी तौर पर निवास स्थान, जन्मतिथि, मूळ निवास का प्रमाण पत्र मांगे जाते है! किंतु इनका सत्यापन नही होता! तब प्रमाण पत्र माँगने का औचित्य क्या रह जाता है! यह सब कानूनी छिद्र है जिनमे से विदेशी मूळ के लोग प्रवेश कर रहे है! सरकार को तुंरत प्रभाव से ऐसे कानून में आमूल-चूल परिवर्तन भी करने चाहिए और जो सरकार की आँखों में धूल झोंककर हमारी छाती पर मूंग दल रहे है, उनका निपटारा भी करना चाहिए! वे भी तो शालीन बन सके और अपराधियों को पकड़ने में भी सहायक बन सके!
हम हर साल 9 अगस्त को 'अंग्रेजो भारत छोडो' दिवस मानते है! 15 अगस्त को 'स्वाधीनता दिवस' मानते है लेकिन उन बुराईयों को छोड़ने का दिन कभी नही मानते जो भारत को हर दिन कमजोर कर रही है! भारत में अवैध रूप से आ बसे करोडो विदेशियों का सवाल हो या आरक्षण और आतंकवाद की आग, अलग-अलग तरह की संकिर्नताये, चरित्रहीनता, धर्म के नाम पर होने वाला पाखंड, सामाजिक कुरीतिया, अशिक्षा और बढता प्रदूषण! सब ऐसी ही बुराईया है! आज समय इन बुराइयों को भारत से भागने का है! युवा पीढी को आगे आकर यह जिम्मा लेना होगा कि वह बुराइयों को भगाकर भारत को जोड़े!
इस काम के लिए यह सबसे बढ़िया समय है! हम भी आज से स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में अपने आप को प्रेरित करेंगे ताकि इन बुराइयों से लड़ने की हिम्मत प्राप्त कर सके!