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(खेल) छिपे हुए गद्दार !!

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चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी



(नोट - लेख अच्छा लगे या बुरा, कृपया टिप्पणी करना न भूले! धन्यवाद!)













मोनिका देवी, (पीडा सही जाए ना.)

भारतीय महिला भारोतोलक मोनिका देवी डोपिंग (प्रतिबंधित दवाए लेने) के आरोप से बरी हो गई, लेकिन तब जबकि ओलम्पिक में अपने प्रदर्शन का उसका साकार स्वप्न रौंद दिया गया! अब भले ही इसे 'प्रक्रियात्मक अनियमितता' का नतीजा बताकर खेल अधिकारी अपनी खाल बचाना चाहे, पर भारत सरकार को केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से इसकी जांच कराकर दोषियों को सजा देनी ही चाहिए!
शुरू से ही इस खेल में कहीं ना कहीं राजनीती या भ्रष्टाचार की गंध महसूस हो रही थी! भारतीय पुरूष भारोतोलक तो बीजिंग ओलम्पिक में शिरकत की योग्यता ही हासिल नही कर पाये, महिलाओं को मौका मिला, तो भ्रष्ट अधिकारियो ने देश को यह श्रेय पाने से वंचित कर दिया! मोनिका के लिए यह तो वज्रपात ही कहा जा सकता है, जिसने न जाने कितने वर्षो की तपस्या के बाद 'ओलंपियन' कहलाने का मौका हासिल किया था!









शैलजा पुजारी

किस्सा यह है कि बीजिंग जाने के लिए मैदान में मोनिका (69 किलो) और शैलजा पुजारी (75 किलो) थी! इस बिच मिडिया में यह ख़बर चली कि बीजिंग जाने के लिए शैलजा ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के एक अधिकारी को 5 लाख रुपये की घूस दी! इस पर खेल मंत्रालय के दखल से बंगलौर में दुबारा दिन भर परीक्षण, बातचीत और बहस के बाद मोनिका का नाम तय हुआ! वैसे भी शैलजा पर डोपिंग के आरोप में 2 साल का प्रतिबन्ध गत फ़रवरी में ही समाप्त हुआ था!
स्वाभाविक था कि जिस अधिकारी ने घूस लेकर शैलजा को बीजिंग भेजने का सौदा किया था, वह चुप कैसे बैठा रहता? अचानक उसके हाथ मोनिका के 6 जून के 'डोप टेस्ट' की रिपोर्ट लग गई! आश्चर्य की बात यह रही कि इसे 6 अगस्त को तब 'लीक' किया गया, जब मोनिका बीजिंग रवाना हने वाली थी! निश्चय ही उस अधिकारी को विश्वास था कि खेल मंत्रालय उसके इस कार्य की सराहना ही करेगा! यह हुआ भी - भारतीय ओलम्पिक संघ(आईओए) के अध्यक्ष से लेकर खेल मंत्री तक सब मोनिका को रोकने पर खुश थे, जबकि भारतीय वेट लिफ्टिंग फेडरेशन (आईडब्ल्यूएफ) ही नियमो की जानकारी होने के कारण मोनिका के साथ था!
नियमानुसार निर्णायक प्रमाण नही होने तक प्रथम परीक्षण का नतीजा उजागर नही किया जा सकता! इस द्रष्टि से 29 जून, 15 जुलाई तथा 28 जुलाई को अनुदैधर्य विश्लेषण के लिए नमूने लिए गए, जो मोनिका के पक्ष में रहे! इस पर आईडब्ल्यूएफ ने तुंरत समीक्षा समिति गठित कर मोनिका को क्लीन चीट दे दी! शनिवार को आशा थी कि भारत सरकार के स्तर पर कार्रवाई तेजी से चलेगी, लेकिन नई दिल्ली से लेकर बीजिंग तक सभी अधिकारी यही कहते रहे कि अब क्या हो सकता है?
भारतीय हॉकी टीम में किसी खिलाड़ी को शामिल करने के लिए रिश्वतखोरी का मामला उजागर होने पर भारतीय हॉकी फैडरेशन के महासचिव ज्योतिकुमारन ने इस्तीफा दे दिया था! अब भारोतोलन में घपला सामने आया है! ऐसा लगता है कि जिस अधिकारी ने शैलजा को बीजिंग भेजने के लिए 5 लाख रुपये लिए थे, उसने तय कर लिया है कि वह मोनिका को भी नही जाने देगा! ऐसी हालत में केन्द्र सरकार को तुंरत सीबीआई जांच करवा कर उस 'देशद्रोही' को दण्डित करना चाहिए! मोनिका की स्पर्ध्दा बुधवार को होनी है, अगर उसे शामिल कराया जा सके तो यह ओलम्पिक भावना में ही इजाफा होगा!