
टेस्ट के बचाव के लिए आधुनिकता की जरुरत है इसीलिए ये कहना ग़लत नही होगा कि टेस्ट मैचो का विरोधी ही, उसका रक्षक साबित हो सकता है.
आधुनिक क्रिकेट का रोमांच चरम पर है! यहाँ नशा है ग्लैमर का, पैसे का और संगीत की मस्ती का! इसीलिए ये क्रिकेट बेहद हसीन है! निश्चित तौर पर क्रिकेट का यह खुबसूरत स्वरुप टी 20 मैच की देन है और आईपीएल ने इसमे चार चाँद लगाए है! आईपीएल के धमाके ने क्रिकेट को एक बाजार के रूप में तब्दील करने के नए नए नुस्खे दिए है और क्रिकेट अब खेल की वजह से ही नही बल्कि मैदान पर होने वाली अन्य गतिविधियों की वजह से भी मनोरंजक हो चली है! क्रिकेट में ये बदलाव एक क्रांतिकारी परिवर्तन है! मगर यह क्रांति जहाँ एक ओर फ़टाफ़ट क्रिकेट के लिए खुशनुमा एहसास लेकर लाई है वही दूसरी ओर इसने परंपरागत क्रिकेट यानि टेस्ट क्रिकेट के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए है! मौत की दहलीज पर खड़ी क्रिकेट की सबसे पुरानी परंपरा की यह हालत निश्चित तौर पर यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि जल्द ही जल्द इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने होंगे वरना टेस्ट क्रिकेट के वजूद को मिटने से रोकना मुश्किल हो सकता है! वैसे तो जब से एकदिवसीय क्रिकेट की शुरुआत हुई तभी से टेस्ट मैचो पर खतरे के बादल मंडराने लगे थे! ऐसा इसीलिए था क्योकि टेस्ट मैचो से ठीक विपरीत एकदिवसीय मैचो के फैसले एक दिन में ही होते है! साथ ही इन मैचो में निर्णय निकालना भी निश्चित था! आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है! एकदिवसीय मैच लोकप्रिय है क्योकि यहाँ हार जीत के निश्चित फैसले के अलावा रंगीन कपड़े है, फ्लड लाईट की दुधिया रोशनी है, सफ़ेद गेंद है और सबसे बड़ी बात कि प्रत्येक चार वर्षो पर एकदिवसीय मैचो की एक विश्व्चैम्पियनशिप भी है! इतना ही नही प्रत्येक वर्ष और भी कई छोटे बड़े टूर्नामेंट के आयोजन ने एकदिवसीय मैचो को दिलचस्प बनाया है! लेकिन जब पाँच दिनों के खेल के बाद भी टेस्ट मैच अनिर्णीत समाप्त होते है तो ऐसी स्थिति में टेस्ट मैचो के प्रति क्रिकेट प्रेमियों की बेरुखी लाजमी है! वास्तव में अगर देखा जाए तो शुरुआत से आज तक टेस्ट क्रिकेट में कोई खास बदलाव नही दिखा! दिन के मैच,सफ़ेद लिबाज,लाल गेंद और क्रिकेट की मंद गति टेस्ट क्रिकेट की पहचान बन गई! समय के साथ टेस्ट क्रिकेट के नियम थोड़े बहुत जरुर बदले! जैसे टेस्ट क्रिकेट में तटस्थ अम्पयारो और थर्ड अम्पयारो की नियुक्ती की जाने लगी तथा मैच रेफरी इन मैचो के जरुरी हिस्सा बन गए! पर इन सब के बावजूद टेस्ट क्रिकेट लोकप्रियता के लिहाज से फ़टाफ़ट क्रिकेट के मुकाबले काफी पीछे रही क्योकि क्रिकेट प्रेमियों को आज भी टेस्ट मैचो के स्वरुप में कोई बदलाव नजर नही आता! इतना सब होने के बाद भी टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को लेकर कभी इतनी चिंता नही की गई जितनी आज की जा रही है! जाहिर है की इंडियन प्रीमियर लीग की जबरदस्त कामयाबी ने टी 20 की लोकप्रियता को बुलंदियों के उस शिखर तक पहुँचाया है जहाँ से एकदिवसीय मैचो का कद भी छोटा नजर आने लगा है! यही कारण है की एकदिवसीय मैचो की तुलना में फीका दिख रहा टेस्ट क्रिकेट टी 20 की मार से बदहवास है और यह इसे झेलने में तभी सक्षम हो सकता है जब इसके स्वरुप में भारी और दिलचस्प फेरबदल हो, साथ ही इसके व्यावसायीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए!
क्या 130 साल पुराने इस खेल के अस्तित्व(टेस्ट मैच) को बचाया जा सकेगा?
सभी वाकिफ है कि क्रिकेट पर आधुनिकता का चाहे जो भी रंग चढा दिया जाए लेकिन हकीकत यह है कि टेस्ट क्रिकेट ही मूसभील क्रिकेट है जिसे खिलाड़ी खेले बगैर परिपक्व नही बनते! पाँच दिनों में खिलाडियों की तकनीक, धैर्य व खेल कौशल की अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ता है और जो खिलाड़ी इस इम्तिहान में पास होते है वही सम्पूर्ण क्रिकेटर माने जाते है! तभी तो आज टी 20 के दौर में भी हर खिलाड़ी टेस्ट खेलने का ख्वाब लेकर जीता है! इसीलिए आधुनिकता के साथ साथ क्रिकेट के मूल स्वरुप को बचाना बेहद जरुरी है! मगर किसी भी चीज के अस्तित्व को संजोए रखने के लिए उसे बदलते समय के सांचे में ढालने की जरुरत होती है! टेस्ट मैचो को भी अब ऐसे सांचे की दरकार है! वैसे क्रिकेट के कर्ताधर्ता भी इस जरुरत को महसूस कर रहे है और इसीलिए उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को बचाने की मुहीम भी शुरू कर दी है! इसके तहत टेस्ट मैचो के विश्व कप के आयोजन की चर्चा भी जोरो पर है! साथ ही टेस्ट क्रिकेट के स्वरुप परिवर्तन पर भी गहन विचार चल रहा है! इस सम्बन्ध में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड सलाह मशवरा कर रहे है और इस सुधार प्रक्रिया के लिए अमेरिकन विशेषज्ञों की एक टीम भी भारतीय कंट्रोल बोर्ड के संपर्क में है! संभावना है कि जल्द ही टेस्ट मैचो के नए स्वरुप का खाका तैयार हो जाएगा! गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष शरद पंवार ने भी कहा है कि टेस्ट क्रिकेट ही वास्तविक क्रिकेट है और भारत इसके अस्तित्व को बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबध्द है और उसमे बीसीसीआई आईसीसी का पुरा सहयोग करेगा!
हालाँकि टेस्ट क्रिकेट के नए खाके का खुलासा तो कुछ दिनों बाद ही चल पाएगा लेकिन इतना जरुर है कि टेस्ट क्रिकेट में बदलावों पर विचार करते हुए क्रिकेट के भाग्य विधाता इस बात को अपनी जहन में जरुर रखेंगे कि आईपीएल की सफलता से उत्साहित इंग्लैंड, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश अपने यहाँ ऐसे ही टूर्नामेंट के आयोजन के लिए आगे बढ़ रहे है! इसके अलावा वेस्टइंडीज में एलन स्टेनफोर्ड लीग भी टी 20 पर पानी की तरह पैसा बहा रहा है! एलन स्टेनफोर्ड ने तो वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच एक टी 20 मैच के लिए विजेता को इतने पैसे दिए है कि उतनी रकम आईपीएल और आईसीएल के विजेता को भी नही मिली! ऐसे में टेस्ट क्रिकेट के खाके को आधुनिकता और व्यावसायिकता का जामा पहनाए बगैर दिलचस्प बनाना मुश्किल होगा! इसमे कोई संदेह नही कि आईपीएल की कामयाबी ने टेस्ट मैचो के लिए चुनौती पेश कि है मगर साथ ही यह सच है कि टेस्ट क्रिकेट को बचाने का नुस्खा भी आईपीएल की सफलता में ही निहीत है! क्रिकेट के कर्ता धर्ताओ को यह समझ लेना चाहिए कि टेस्ट क्रिकेट के अस्तित्व को तभी बचाया जा सकता है जब इसमे हर मैच का नतीजा निकले और साथ ही इसे एकदिवसीय और टी 20 क्रिकेट की तरह आकर्षक बनाया जा सके! आईपीएल ने इसके लिए हमें राह जरुर बताई है! आईपीएल के दौरान मैदानों में किए गए प्रयोगों को टेस्ट क्रिकेट में भी आजमाया जा सकता है! मसलन एकदिवसीय और टी 20 क्रिकेट की तरह ही रंगीन लिबाज, फ्लड लाइट्स का प्रयोग, क्रिकेट के साथ साथ नाच गानों का दौर और मैदान में फिल्मी हस्तियों का जमावडा टेस्ट क्रिकेट को आकर्षक बनाने में मदद करेंगे और फ़िर टेस्ट क्रिकेट भी ग्लैमर की चाशनी में गोता लगाती नजर आयेगी! ग्लैमर की यह चाशनी ना केवल मैदान में दर्शको को आने पर मजबूर करेगी बल्कि इससे विज्ञापनों की होड़ भी लगेगी! निश्चित तौर पर टेस्ट क्रिकेट को रोचक बनाने और इसमे व्यावसायिक रंगों से सराबोर करने में यह प्रयोग अहम भूमिका निभा सकता है! हालांकि यह कहा जा सकता है कि पाँच दिन के क्रिकेट में सब कुछ सम्भव नही जो आईपीएल में देखने को मिला, लेकिन आईपीएल की शुरुआत से पहले भी किसी ने कहाँ सोचा था कि ऐसे प्रयोग सफल होंगे! ऐसे प्रयोग इसीलिए भी आवश्यक है क्योकि आईपीएल जैसे टूर्नामेंट ने उन टेस्ट खिलाडियों को संन्यास के लिए प्रेरित किया जो अभी भी टेस्ट क्रिकेट को बहुत कुछ देने की क्षमता रखते थे, लेकिन आईपीएल के धन और ग्लैमर ने उनके टेस्ट कैरियर को समय से पहले ही विराम दे दिया! काबिलेगौर है कि आईपीएल से पहले एडम गिलक्रिस्ट,स्टीफन फ्लेमिंग के अलावा कई शानदार टेस्ट खिलाडियों ने संन्यास लेने में जल्दबाजी दिखाई! यही नही, इस टूर्नामेंट के शुरू होने के कुछ महीने पहले जितनी संख्या में खिलाडियों ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा उसकी मिसाल क्रिकेट इतिहास में नही मिलती! कहा जाता है कि इतनी संख्या में खिलाडियों के संन्यास के पीछे आईपीएल में मिलने वाली वो मोटी रकम थी जो टेस्ट क्रिकेट की वर्तमान व्यवस्था में असंभव है! इसका प्रत्यक्ष प्रमाण इस बात से मिलता है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड ने मार्च-अप्रेल में टेस्ट टीम के साथ पाकिस्तान दौरे पर जाने से मना कर दिया था! गौर करने वाली बात यह है कि साइमंड्स आईपीएल के सबसे महंगे खिलाड़ी थे! ऐसे में वो टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए पाकिस्तान का दौरा करते तो उन्हें भारी आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ता! खैर, ऑस्ट्रेलिया का वह दौरा सुरक्षा कारणों से रद्द हो गया! मगर इस मामले में यह भी कहा गया कि दौरा रद्द करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई खिलाडियों ने बोर्ड पर दबाव बनाया ताकि वो आईपीएल में खेल सके! मतलब साफ़ है ऐसे लीग मैच पैसे के बल पर खिलाडियों को टेस्ट क्रिकेट से विमुख कर रहे है जिससे टेस्ट क्रिकेट नीरसता की और बढ रहा है! लेकिन टेस्ट मैचो में भी आईपीएल में किए गए प्रयोगों को सफल बनाने की कोशिश की जाए तो यहाँ भी बल्ले और गेंद में धन की बारिश हो सकती है और खिलाडियों को टेस्ट मैचो से भी आईपीएल की तरह आर्थक संतुष्टि मिल सकती है!
टेस्ट के बचाव के लिए आधुनिकता की जरुरत है इसीलिए ये कहना ग़लत नही होगा कि टेस्ट मैचो का विरोधी ही, उसका रक्षक साबित हो सकता है.
संभावना है कि क्रिकेट के कर्ता धर्ता टेस्ट पारियों में ओवरों की संख्या को निर्धारित करने पर विचार कर रहे है ताकि मैच का परिणाम सुनिश्चित हो सके! मैच के नतीजे के ख्याल से यह निश्चित रूप से यह सकारात्मक पहल हो सकती है! वैसे मैच में निर्णय के लिए बॉल आउट जैसे विकल्प भी खुले है!
टेस्ट के अस्तित्व को लेकर जो आशंका जाहिर की जा रही है, उसकी एक वजह धीमी रन गति भी है! लेकिन यहाँ ऐसी व्यवस्था बन सकती है जो टेस्ट क्रिकेट को भी एकदिवसीय और टी 20 मैचो की तरह ही गतिशीलता प्रदान कर सके! इसके लिए चार और छह रनों के अलावा बिना दौडे दो और तीन रनों की व्यवस्था हो तो बेहतर होगा! साथ ही कुछ इस प्रकार के नियम बने जो हर गेंद में एक रन और ओवर में कम से कम छह रन सुनिश्चित करे! ऐसा होने से टेस्ट क्रिकेट में भी तेजी के साथ रनों का अंबार देखने को मिलेगा और क्रिकेट प्रेमियों की इसमे दिलचस्पी भी बढेगी! इतना ही नही किसी खिलाड़ी के व्यक्तिगत 50,100,150,200 और 250 रनों पर उसकी टीम के लिए बोनस रनों का प्रावधान किसी भी टेस्ट को रोचकता प्रदान करेगा! गेंदबाजों के अच्छे प्रदर्शन पर भी उनकी टीम के लिए बोनस रनों का प्रावधान किया जा सकता है!
रंगीन कपड़े फ्लड लाइट्स की दूधिया रोशनी में दिन और रात के मैच, सफ़ेद गेंद, दर्शको को मद मस्त करने वाली थिरकती चीयर गर्ल्स, मैदान में फ़िल्म स्टार और संगीत की मस्ती, हर गेंद पर कम से कम एक रन और अंत में मैच का सुनश्चित फ़ैसला! अगर टेस्ट क्रिकेट का स्वरुप ऐसा हो तो ऐसी क्रिकेट का आनंद किसी एकदिवसीय या टी 20 मैच से कम नही होगा! निश्चित तौर पर पाँच दिवसीय टेस्ट का ऐसा स्वरुप किसी पाँच दिवसीय मेले का रूप ले सकता है!
वैसे इस सम्बन्ध में अन्तिम फ़ैसला आईसीसी को लेना है! वो टेस्ट क्रिकेट में परिवर्तन के किस स्वरुप पर अपनी मुहर लगाती है यह आने वाले कुछ दिनों में पता लगेगा! लेकिन इतना जरुर है कि आधुनिकता, ग्लैमर और गति समय की मांग है और आईसीसी इस बात से भलीभाँती वाकिफ है कि नई व्यवस्था में बदलते समय को ध्यान में रखना जरुरी है वरना क्रिकेट की 130 साल पुरानी परंपरा को बचाना मुश्किल होगा! क्रिकेट प्रेमियों को इंतजार है कि आईसीसी टेस्ट क्रिकेट के लिए एक क्रांतिकारी व्यवस्था लेकर आए जो इसकी लोकप्रियता को आसमान की बुलंदियों तक पहुंचाँ सके!
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