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(क्रिकेट) जितना आगे- उससे ज्यादा पीछे!!!!


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी



(नोट- लेख आपको अच्छा लगे या बुरा कृपया टिप्पणी करना ना भूले! धन्यवाद!)


कप्तान स्मिथ को तो यह भी अधिकार नही कि मैच खेलने वाले आखिरी 11 चुन सके!






















अश्वेत अफ्रीकी क्रिकेटरों में से नतिनी जैसा और कोई कामयाब नही रहा!


















दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट में रंग की चर्चा का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी वहा क्रिकेट!जब रंगभेद का अंत हुआ तो लगा था कि रंग की चर्चा भी ख़त्म लेकिन ऐसा नही हो रहा!मौजूदा अध्यक्ष नॉर्मन एरंडसे द्वारा वीटो का प्रयोग करते हुए चुनी टीम बदलने की बिना वजह कोशिश और भारत दौरे में आंद्रे नेल की जगह रंगीन खिलाडियों की गिनती बढाने के लिए चार्ल लेंगवेल्ट को टीम में शामिल करना दो इसे मसले थे जिन्होंने क्रिकेट साउथ अफ्रीका को बदलाव के इस दौर का जायजा लेने और आगे के प्रयास की जानकारी के लिए एक रिव्यू कमेटी बनाने पर मजबूर किया!
रिव्यू की रिपोर्ट आई और उनके सभी १२ सुझाव को क्रिकेट साउथ अफ्रीका ने ज्यों का त्यों मंजूर कर लिया!इनमे से ख़ास--
* बोर्ड अध्यक्ष के पास चुनी टीम बदलने का वीटो अधिकार नही होगा- कमेटी ने भी माना कि अध्यक्ष ने इस वीटो का ग़लत प्रयोग किया!
* अध्यक्ष और बोर्ड बदलाव के इस दौर में बदलाव नीती को लागू करने के लिए काम करेंगे ताकि चुनी टीम दक्षिण अफ्रीका का सही प्रतिनिधित्व हो- हां, सी. ई.ओ. और चयन समिति के कनवेनर बोर्ड अध्यक्ष को इस बदलाव की जानकारी देते रहेंगे!
* कप्तान और कोच का टीम के चयन में वोट नही होगा लेकिन चयनकर्ता उनसे सलाह करेंगे!कोच और कनवेनर खेलने वाले आखिरी 11 खिलाडी चुनेंगे- उसके बाद कप्तान टीम का इंचार्ज होगा!
* चयनकर्ता अनुभवी,योग्य और खेल की समझ रखते हो तथा उन पर ये विश्वास किया जा सके कि वे सही प्रतिनिधित्व और दक्षिण अफ्रीका में लागू बदलाव नीती के अनुसार टीम चुने!
* चयन समिति में एक सीट 'अश्वेत अफ्रीकी' के लिए हो!
स्पष्ट है कि अध्यक्ष से वीटो पावर छिनने के अतिरिक्त रिव्यू कमेटी ने ऐसा कोई सुझाव नही दिया जिससे दक्षिण अफ्रीका में हालत सुधरे!रिव्यू कमेटी ने यह नही बताया कि अश्वेत अफ्रीकी से उनका मतलब क्या है?
दक्षिण अफ्रीकी चार हिस्सों में बँटे है- अश्वेत,रंगीन,भारतीय और गोरे!क्या मौजूदा चयनसमिति में किसी अश्वेत अफ्रीकी के लिए सीट रिजर्व न होने का मतलब ये है कि चयनकर्ता अपना काम ठीक तरह नही कर रहे और सिर्फ़ अपने लोग चुनते है!इसी तरह क्या अश्वेत अफ्रीकी सिर्फ़ अश्वेत खिलाडियों के चयन की ही कोशिश करेगा?
दक्षिण अफ्रीका यह एहसास नही कर पाया है कि इतनी सब कोशिशों के बावजूद सिर्फ़ मखाया नतिनी,मुनेको नैम,लूट्स बोसमेन,थमी सोलकिले और थदिसबालाला ही ऐसे अश्वेत क्रिकेटर है जो चर्चा में आए! 15 खिलाडियों में कम से कम 7 खिलाडियों कि मौजूदगी अश्वेत वर्ग से हो- इस नीती से क्रिकेट कहा बढ़ी है?
और किस देश में ऐसा हो रहा है कि कप्तान चुने 15 में से आखिरी 11 चुनने का अधिकार भी ना रखता हो?जिस कप्तान को उसकी मर्जी के बिना टीम दी जायेगी- वह न जीतने के लिए कैसे जिम्मेदार होगा?
रिव्यू कमेटी यह सोचने में असफल रही कि अगर यू ही प्रतिभाशाली क्रिकेटर जाते रहे तो दक्षिण अफ्रीका का क्रिकेट भविष्य क्या होगा?नेल कि कीमत पर जिस लेंवेल्ट को जबरदस्ती चुना उसने भी तमाचा मारा और यह कह कर भारत नही आया कि जिन हालत में उसे टीम में जगह मिली है, उनमे वह नही खेल सकता!बाद में उसकी जगह एक और अश्वेत मोंड जोंडेकी को मिली जिसे स्मिथ ने दौरे में एक मैच भी नही खिलाया! लेंवेल्ट ने डर्बीशायर का कोलपैक कांट्रेक्ट ले लिया और यह भी चिंता नही की कि इस वजह से दक्षिण अफ्रीका के लिए खेलने के सभी अवसर ख़त्म!
नेल हमेशा के लिए इंग्लैंड जाते जाते रुक गया- वह इन दिनों इंग्लैंड में खेल रही दक्षिण अफ्रीका की टीम में है!





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