
(नोट--- पढ़ने के बाद लेख अच्छा लगे या बुरा,कृपया टिप्पणी करना ना भूले! धनयवाद!)
लो जी लो, फिर घमासान छिड़ गया!भारत और इंग्लेंड अपनी -अपनी चैम्पियंस लीग को लेकर एक दूजे के सामने दो बांको की तरह आ अड़े है!भारतीय बोर्ड इसे अपने यहा आयोजित करना चाहता है तो इंग्लेंड वाले शारजाह मे कराने को बेताब है!दोनो की इस बेताबी के पीछे कारण क्या है?दोनो देशो के खिलाड़ी खूब क्रिकेट खेल रहे है और जितनी क्रिकेट खेल रहे है उतना पिट भी रहे है!एक जमाने मे दुनिया मे सिरमौर माने जाने वाली इंग्लेंड की टीम की हाल आज क्या बना हुआ है,ये सबके सामने है!उन्हे देख कर यही कहने को जी चाहता है- ये क्या हाल बना रखा है,कुछ लेते क्यू नही?कमोबेश यही हाल भारतीयो का है!पिछले टेस्ट मॅच मे श्रीलंका ने ऐसा धोया कि दिन मे ही तारे दिखलाई देने लगे!ऐसी करारी हार मानो किसी विश्व स्तर कि टीम ने मोहल्ला टीम को धो धो कर पिटा हो!सारी दुनिया मे अपनी बल्लेबाजी का डंका पीटने वालो की जमकर धुलाई हुई,लेकिन कोई फ़र्क नही पड़ता जी!आज क्रिकेट का मतलब क्रिकेट नही, पैसा रह गया है!बेचारे भारतीय बल्लेबाज इतना क्रिकेट खेलने लगे है कि उन्हे आराम करने की ज़रूरत पड़ने लगी है!धोनी होशियार निकले!थकान के नाम पर श्रीलंका जाने से बच गये!वरना मेनडिस और मुरली की गेंदो के सामने सारी बनी बनाई हवा निकल जाती!कम से कम इतना कहने को रह गया है कि हम टीम मे ना थे वरना ऐसी बुरी हार न मिलती!यू भी धोनी जानते है कि उनका भविष्य २०-२० के क्रिकेट मे है न कि कदमताल करने वाले टेस्ट क्रिकेट मे!
अब यह भी न समझ बैठना कि इंग्लेंड और भारत के क्रिकेट अधिकारियो को क्रिकेट से इतना प्यार हो गया है!दरअसल अब क्रिकेट मे इतना पैसा आ गया है कि डब्बू पोपट और चिंटू भी अपना कैरियर क्रिकेट मे देखने लगे है!अब घमासान खेल के लिए नही पैसो के लिए हो रहा है!क्रिकेटरो को खेल से ज़्यादा इवेंट मैनेजर चला रहे है!किसको किस पर हल्ला बोलना है?कौन टाइगर है?कौन योद्धा है?कौन जाँबाज़ है?कौन खिलाड़ी है और कौन अनाड़ी है,ये सब खेल के मैदान मे नही,किसी कंपनी के दफ़्तर मे तय होता है?वैसे भी अब खेलना किसे है ससुर!खेल भावना तो एक पुराने ईमानदार स्वतंत्रता सेनानी की तरह हो गयी है जिसका संम्मान उसकी संताने इसीलिए नही करती कि उसने देश की सेवा को भुनाया ही नही!सेवा का मेवा तो फर्जी लोग खा रहे है!एक बार भारतीय टीम ने पाँच की बजाय चार दिन मे ही टेस्ट मॅच जीत लिया तो उन्हे पाँच की बजाय चार दिन का ही मेहनताना मिला!अब इतनी बुरी तरह हारने के बाद भी क्रिकेटरो को शर्म नही आती है!
लोड हो रहा है...
प्रतिक्रियाएँ