

{1.}ये है स्विटजरलैंड की रेलवे जिसे हाल में यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है। राइटियन रेलवे का मार्ग स्विट्जरलैंड के पुश्लव वादियों में बनाया गया है और इसकी बनावट ही इसे ऐतिहासिक बना देती है।

{2.}स्विटजरलैंड के राइटियन रेलवे के लैंडवासर सुरंग से गुजरती हुई रेलगाड़ी किसी खुफिया रास्ते से गुजरती हुई नजर आ रही है। यही है इस रेलवे की खूबसूरती जिस वजह से विश्व धरोहर समिति ने इसे ‘यूनेस्को के विश्व धरोहर’ की सूची में जगह दी है।

{3.}मध्य स्विटजरलैंड में पर्यटकों द्वारा निहारे जा रहे पहाड़ियों की श्रृंखला-सी दिखने वाले इस कुदरती देन की गिनती भी अनमोल धरोहर में होने लगी है। ‘स्विस टेकटॉनिक सरडोना’ या ‘ग्लैरस ओवरथ्रस्ट’ को संयुक्त राष्ट्र की शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की विश्व धरोहर समिति ने अपने ‘विश्व धरोहर’ सूची में दर्जा दिया है।

{4.}इजरायल के शहर हाइफा में बसे इस अप्रतिम ‘बहाई मंदिर’ को देखने के लिए यहां हमेशा सैलानियों की भीड़ उमड़ी रहती है। मंदिर के परिसर में बने बाग के ऊपर से ली गई तस्वीर में इस मंदिर की खूबसूरती देखते ही बनती है। हाइफा और अक्को की बहाई मंदिरों को भी यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है।

{5.}चीन के सुदूर दक्षिण-पूर्वी पहाड़ियों में दिखेंगे ये मिट्टी से बनी इमारतें जिन्हें नाम दिया गया है ‘टुलोऊ’। चीन के फुजिआन इलाके में स्थानीय निवासी इन मिट्टी की इमारतों के आगे जश्न मना रहे हैं। कनाडा के क्यूबेक शहर में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 32वें संस्करण में इसे विश्व धरोहर की सूची में जगह मिली।

{6.}19वीं सदी की शुरुआत में जर्मनी के बर्लिन में बनी आधुनिक किस्म की छह इमारतों की योजना को यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है। इस तस्वीर में दिख रही है जर्मनी के भवन निर्माता हांस शोरन की रिहायशी कॉलोनी की एक इमारत। इन भवन निर्माताओं में शामिल हैं ब्रूनो टुट, मार्टिन वैगनर और वॉल्टर ग्रोपियस जो हमेशा जीवनशैली को बेहतर बनाने और ‘धूप, रोशनी और हवा’ को ध्येय रखकर ही इमारतों का निर्माण करते थे।

{7.}अपनी कलात्मक लोहे की छत के लिए मशहूर इंग्लैंड का ‘टाइनमाउथ स्टेशन’ भी बन गया विश्व धरोहर। विक्टोरिया के समय के इस भव्य स्टेशन का ढांचा विलियम बेल ने 1882 में बनाया था। देश के धरोहर के रक्षक ने बताया कि इंग्लैंड की हजारों इमारतों को लापरवाह जमीदारों, बरसात और जमीन खोदने वाले खरगोशों से खतरा है।

{8.}बदले की भावना और अतिक्रमण का शिकार बने इंग्लैंड के कम्ब्रिया इलाके में बसा है यह ‘बर्करिग स्टोन सर्कल’ जिसे अब जाकर विश्व धरोहर के रूप में पहचान मिली है। माना जाता है कि 1700-1400 ईसा पूर्व में इस स्थान को दफनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इंग्लैंड के धरोहर विभाग ने देश के तकरीबन 70,000 इमारतों, स्मारकों, बाग, युद्ध के मैदानों का सर्वेक्षण कर पाया कि हर 12 में से एक इमारत लापरवाही के कारण बदहाल है।

{9.}50 साल से भी ज्याद समय तक उपेक्षा की मार झेल रही यह इमारत है ‘लोथर कैसल’। इंग्लैंड के कम्ब्रिया में पेनरिथ के नजदीक बनी इस इमारत को बनाया था रॉबर्ट स्मर्क ने। इसे खाक बनने से बचाने के लिए इसके बगीचों और ढांचे के मरम्मत का काम जारी है।